गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2025 में अनुमान से अधिक लचीली रही है संजय मल्होत्रा जो कि RBI के गवर्नर है। भारत की जीडीपी दर की वृद्धि का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया गया है।
GST सुधार में RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज यानि बुधवार को अपनी बात रखी की यह विकास को बढ़ावा देने वाले संरचनात्मक सुधारों के कार्य से बाहरी चुनौती के लिए यह कुछ प्रतिकूल प्रभाव की भरपाई की होने की उम्मीद हो सकती है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या बताया?
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एक स्ट्रांग पॉलिसी खपत और निश्चित इन्वेस्टमेंट के कारण भारत की जो GDP 2025 और 26 की पहले क्वार्टरली में 7.8 प्रतिशत तक की स्ट्रांगेस्ट इंक्रीमेंट दर्ज की जा सकती है।
देखें सप्लाई साइड और ग्रंथ में आखिर क्या है?
सप्लाई साइड में विनिर्माण क्षेत्र में पुनरुद्धार और उनके सेवाओं के स्थिर रूप से विस्तार के कारण इसका मूल्य वर्धित रूप में 7.6% की वृद्धि हुई है। इसमें उपलब्ध हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर यह सजेस्ट करते हैं कि कौन सी आर्थिक गतिविधि लचीली बनी हुई है। जो ग्रामीण लोगों के कृषि के गतिविधियों में और मौसम अच्छे होने के कारण अभी तक सशक्त और स्ट्रांग बनी हुई है जबकि यहां शहर के लोगों को मांग में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है जिसकी वजह से एक हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर देखने को मिल सकता है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा की:
संजय मल्होत्रा ने कहा कि इन सभी गतिविधियों के कारकों को देखते हुए 2025 और 26 के लिए जो वास्तविक GDP में वृद्धि का अनुमान लगाया गया है अब वह 6.8 प्रतिशत है जिसमें से अगली दूसरी तिमाही में वह बढ़कर 7.0% हो जाएगी, इसके साथ ही तीसरी तिमाही में यह 6.4% के आसपास फिर आ सकती है और साथ में जो चौथी तिमाही होती है उसमें इसका GDP घटकर 6.2% फिर से वापिस रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि भारत में 2025 में जो वैश्विक अर्थव्यवस्था का अनुमान से अधिक लचीली रही है, जिसमें अमेरिका और चीन में काफी ज्यादा वृद्धि देखी गई है लेकिन जो बढ़ी हुई पॉलिसी है वह अनिश्चित के बीच आउटलुक अभी अस्पष्ट बना हुआ है। अभी तक कुछ विकसित इकोनॉमिक्स की मुद्रा स्थिति की गतिशीलता से निपट रही है इसके वजह से वित्तीय बाजारों में काफी उतार चढ़ा हो रहा है इसके साथ एक दूसरी तिमाही के लिए अमेरिकी डेवलपमेंट डिजिटस में संशोधन करने के बाद अमेरिकी डॉलर और भी ज्यादा मजबूत स्ट्रांग हुआ है और अभी हाल ही के पॉलिसी रेट में बदलाव की उम्मीद के स्पेशल स्ट्रेटजी यील्ड काफी ज्यादा मजबूत हुई है कई विकसित और ऊपर से बाजार के इकोनॉमिक्स में equity share market ऐसे ही मजबूत बने हुए हैं।
RBI गवर्नर ने वित्तीय वर्ष के लिए क्या कहा?
गवर्नर ने इसके साथ ही कहा कि इस financial year यानी अप्रैल जुलाई में अब तक के जो भी केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व में के Expense में जो सबसे ज्यादा Strong growth दर्ज की गई है वह इन्वेस्टमेंट गतिविधि जैसे की कैपिटल साइन जो जुलाई से अगस्त में सीमेंट जैसे उत्पादन और इस्पात खपत में स्वस्थ रूप से वृद्धि का पता चल रहा है भले ही capital goods के उत्पादन और इसका आयात में कुछ मध्यम स्तर देखा गया है जो की रिकंस्ट्रक्शन एरिया में सुधार जारी है।
ऐसे देखा जाए तो:
यह मानसून के सामान्य से अधिक हुई खरीफ बोवाई की अच्छी प्रगति के साथ इसके जलाशय को पर्याप्त स्थल मिलता है जो किसानों के लिए एक अच्छी कैपिटल की संकेत हो सकती है और इसके साथ ही जो ग्रामीण लोगों की मांग की जो संभावनाओं को और आगे बढ़ा रहे हैं साथ ही उसे उज्जवल भी कर रहा है।
बात करें इसके सर्विस एरिया की मजबूती की तो यह काफी ज्यादा स्ट्रांग होने के साथ ग्रामीण में काफी ज्यादा लाभदायक हो सकता है, इसके साथ यह रोजगार की स्थिर स्थिति और मांग का समर्थन कर रही है जिसे वस्तु और GST के दरों के युक्तिकरण से और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिससे GST कम या ज्यादा हो सकता है।
इससे इसके बढ़ती capacity utilization और इसके विपरीत favorable financial conditions और इसके साथ ही Improving domestic demand को निश्चित Investment को कंटिन्यू करने के लिए काफी अधिक helpful होनी चाहिए जिससे मार्केट में लिमिटेशन होती है।
Business policy:
दोस्तों यह चल रही tariff और trade policy में अनेक अनिश्चित वस्तुओं और बाहरी सर्विसेज की जो मांग को प्रभावित करेगी वह काफी हेल्पफुल रहने वाली है इसके साथ ही लंबे समय तक चलने वाली वह GeoPolitical tensions और जो इन्वेस्टर्स के जोखिम और anti-mood के वजह से international financial markets में अस्थिरता भी विकास की दृष्टिकोण के लिए जोखिम बनी हुई है इसके साथ जो इन्वेस्टर्स है उनके लिए जो वित्तीय बाजार हैं वह काफी ज्यादा जोखिम भरा साबित हो सकता है जिससे उन्हें हानि भी हो सकती है
Reality industrial groups:
Reality industrial groups ने अपनी next policy की मीटिंग की सूची शेयर करके बताया कि Real estate sector में CREDAI and NAREDCO ने बुधवार को आरबीआई से अपने दूसरी मौद्रिक नीति में जो अभी मुख्य प्रमुख रिपोर्टर की में कटौती करने काअनुरोध किया है जिससे लोगों की आवासीय संपत्तियों को, जैसे की खास करके महंगे, किफायती और बड़े बंगलो जैसे घरों को लेने की लोगों में मांग को बढ़ावा मिल सके जिससे रियल एस्टेट की और आगे बढ़ सके।
साथ ही RBI के पिछली बार का जो interest rates में कटौती का मौजूद लाभ है और साथ ही new home loans borrowers (उधारकताओं) को देंगे, reality industrial groups ने RBI से ये आशा जताई है।